कमाल की खोज: मरीजों को बड़ी राहत, जानें कैसे होंगे 500 रुपये वाले टेस्‍ट महज तीन रुपये में

चंडीगढ़, [वीणा तिवारी]। गंभीर रोगों से पीडि़त मरीजों के लिए बड़ी राहत की बात है। मधुमेह, ह्रदयरोग, रक्तचाप, स्तन कैंसर आदि रोगों का निदान (डायग्नोसिस) अब स्वदेशी सेंसरयुक्त किट के जरिये सस्ता और आसान हो जाएगा। चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गेनाइजेशन, सीएसआइओ) की यह खोज आयातित किट पर निर्भरता खत्म कर देगी। विदेशी किट से निदान पर मरीजों को फिलहाल 100 गुना से भी अधिक  खर्च करना पड़ रहा है।


मधुमेह, ह्रदयरोग, रक्तचाप, कैंसर जैसे रोगों का निदान स्वदेशी डायग्नोसिस किट से होगा सस्ता और आसान


सीएसआइओ का कहना है कि अब डायग्नोसिस के लिए विदेशी कंपनियों कीमहंगी जांच किट आयात करने की नौबत नहीं आएगी। भारत में ही ऐसी किट विकसित कर ली गई है, जो विदेशी किट की तुलना में 100 गुना कम दाम पर उपलब्ध होगी। ऐसा संभव हो पाया है वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए विशेष सेंसर से।


इस सेंसर की मदद से अलग-अलग बीमारियों की जांच के लिए बनाई जाने वाली जांच किट का निर्माण स्वदेश में संभव हो सकेगा। अब तक भारत में कोई भी कंपनी ऐसा सेंसर नहीं बना रही थी। जिसकारण विदेशी कंपनियों से मुंहमांगी कीमत पर किट आयात करनी पड़ रही थीं।


केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन के वैज्ञानिकों ने तैयार किया कारगर सेंसर
इस सेंसर को बनाने वाले सीएसआइओ के वैज्ञानिकों का कहना है कि उनके इस शोध के बूते देश में डायग्नोसिस के क्षेत्र में जल्द ही बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। सेंसर में कार्बन इंक का प्रयोग किया गया है जबकि विदेशी सेंसर में कॉपर और अन्य धातुओं का प्रयोग किया जाता है। जिससे उसकी कीमत 300 से 500 रुपये प्रति सेंसर होती है। सीएसआइओ में बनाए गए विशेष सेंसर की लागत तीन से पांच रुपये आ रही है।


डायग्नोसिस में इस्तेमाल हो रही आयातित महंगे किटों पर निर्भरता होगी खत्म


सीएसआइओ की नैनो टेक्नोलॉजी यूनिट में इस सेंसर को बनाने वाले सीनियर वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कौशिक और डॉ. आकाश ने बताया कि इसे बनाने में स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक से बनाए गए इलेक्ट्रोड का प्रयोग किया गया है। नैनो तकनीक से तैयार हुआ यह सेंसर शरीर के एंजाइम परीक्षणके माध्यम से नतीजे देगा।


जैसे शुगर लेवल की जांच के लिए सेंसर में ग्लूकोज ऑक्सीडेज एंजाइम का उपयोग करना होगा, ठीक इसी तरह ब्रेस्ट कैंसर और अन्य बीमारियों के लिए भी निर्धारित एंजाइम का उपयोग करना होगा। बता दें कि शरीर में एक विशेष प्रकार के उत्प्रेरक पाए जाते हैं, जो मूल रूप से कार्बनिक अवस्था में होते है। इन्हेंं एंजाइम कहा जाता है।


डॉ. प्रवीण कौशिक ने बताया कि सेंसर का उपयोग अलग-अलग बीमारियों से संबंधित जांच के लिए किया जा सकता है, जिसके लिए इसे अलग-अलग तरह से इस्तेमाल करना होगा। सेंसर को प्रोग्राम्ड मशीन में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जैसा कि मौजूदा किट या मशीनों में होता है, और जांच चंद सेकेंड में हो जाएगी।